सूरज से सेट होने वाला कम्पास

फ़ोन का चुंबकीय कम्पास अक्सर 10–30° तक ग़लत दिखाता है – इस्पात, स्पीकर और बालकनी की रेलिंग उसे भटका देते हैं। सूरज को कुछ नहीं भटकाता: किसी भी जगह और समय के लिए उसकी दिशा एक डिग्री के दसवें हिस्से तक सटीक निकाली जा सकती है।

मार्गदर्शिकाएँ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फ़ोन का चुंबकीय कम्पास ग़लत क्यों दिखाता है?

इस्पात, स्पीकर और बालकनी की रेलिंग चुंबकीय क्षेत्र को मोड़ देते हैं – 10 से 30 डिग्री की ग़लती आम बात है। इसके ऊपर चुंबकीय दिक्पात भी है, यानी चुंबकीय और भौगोलिक उत्तर का अंतर, जिसे SunCompass आपके स्थान के लिए ख़ुद सुधार देता है।

सूर्य कम्पास कैसे काम करता है?

कैमरा चालू करें, क्रॉसहेयर को सूरज पर रखें और “सूरज निशाने पर” पर टैप करें। आपकी जगह और समय के लिए सूरज की दिशा एक डिग्री के दसवें हिस्से तक ज्ञात होती है – इसी से कम्पास असली उत्तर जान लेता है और फिर बिना मैग्नेटोमीटर के, ओरिएंटेशन सेंसर के सहारे चलता है। इस दौरान स्क्रीन पर देखें, सूरज की ओर सीधे कभी न देखें।

भौगोलिक और चुंबकीय का क्या मतलब है?

भौगोलिक (वास्तविक) का मतलब है उत्तरी ध्रुव के सापेक्ष – नक्शे और सूरज की गणना इसी पर चलती है। चुंबकीय का मतलब है चुंबकीय क्षेत्र के सापेक्ष – यही हाथ का कम्पास दिखाता है। दोनों का अंतर आपके स्थान का दिक्पात है; यह स्विच के बगल में दिखाया जाता है।

कुछ देर बाद फिर से निशाना क्यों लगाना चाहिए?

फ़ोन का जाइरोस्कोप धीरे-धीरे खिसकता है। लगभग दस मिनट बाद सूरज पर दोबारा निशाना लगाना फ़ायदेमंद है – SunCompass आपको याद दिला देता है।

ऐप को मेरा स्थान क्यों चाहिए?

सिर्फ़ सूरज की स्थिति के लिए: सूरज का दिगंश और ऊंचाई जगह और समय पर निर्भर करते हैं। लगभग 10 किमी तक सटीक स्थान काफ़ी है – 50° अक्षांश पर 100 किमी की चूक सूरज की दिशा को 1 से 3° तक खिसका देती है, सबसे ज़्यादा गर्मियों में दोपहर को।